Urdu Shayari

Ramadan Mubarak 2021

उठेंगें हाथ दुआओं के लिए, और ‘खु़दा’ से बात होगी, इस ‘जहां’ के लिए, ‘दस्त-ए-शिफ़ा’ की फ़रियाद होगी। रमजान मुबारक…

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Dil Fareb Muskurahat

  दिल फ़रेब मुस्कुराहट से दर्द छुपा लेते हैं लोग कहाँ लाज़िम है खुश मिज़ाज का खुशगवार होना – अलादिन

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मेरे दुख की दवा करे कोई

इब्न-ए-मरियम हुआ करे कोई मेरे दुख की दवा करे कोई शरअ’ ओ आईन पर मदार सही ऐसे क़ातिल का क्या…

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मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ

दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ जम्अ’ करते हो क्यूँ रक़ीबों को इक तमाशा हुआ…

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इश्क़ मुझ को नहीं

इश्क़ मुझ को नहीं वहशत ही सही मेरी वहशत तिरी शोहरत ही सही क़त्अ कीजे न तअल्लुक़ हम से कुछ…

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मुफ़्त आए तो माल अच्छा है

हुस्न-ए-मह गरचे ब-हंगाम-ए-कमाल अच्छा है उस से मेरा मह-ए-ख़ुर्शीद-जमाल अच्छा है बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहज़ा…

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हम-ज़बाँ कोई न हो

रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो बे-दर-ओ-दीवार…

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कुछ न होता तो ख़ुदा होता

न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं…

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आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना

बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना गिर्या चाहे है ख़राबी मिरे…

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बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे इक खेल है औरंग-ए-सुलैमाँ मिरे नज़दीक इक बात है…

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