Sangeeta Patidar

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    बेवज़ह ही

    जब तुम सुनना चाहते थे तब सुनाया नहीं, अब बेवज़ह ही मैं तुम्हें परेशान करती हूँ, अब बेफ़िजूल ही… तुम्हारा…

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    नाम अपना दे आई हूँ मैं

    नाम अपना दे आई हूँ मैं मन्नत के धागों में, एक दुआ और बाँध आई हूँ मैं, तेरी जिंदगी के…

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    क्या इन्तजाम करे कोई!

    क्या इन्तजाम करे कोई ‘खामोशी’ का क्या मतलब निकाले कोई, ‘जवाब’ न मिले तो क्या सवाल करे कोई, हाँ, जरूरी…

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  • Hindi Poem, Latest poem in hindi

    Satrangi Libaas

    सतरंगी लिबास… चलो, अल्फाजों को रंग-बिरंगे सतरंगी लिबास ओढ़ा दे, शायद, इन खामोशियों को भी थोड़ा सुकून मिल जाए ।…

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  • Hindi Poem, Latest poem in hindi

    Tu-Main, ‘Hum’ Hain

    तू-मैं, ‘हम’ हैं, इसलिए ये प्यार का एहसास भी है, ‘तू-मैं-मैं-तू’ में रहता, तो कब का बिखर गया होता ।…

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  • Hindi Poem, Latest poem in hindi

    Sangeeta Patidar

    संगीता पाटीदार, भोपाल; म० प्र० से हैं। इन्होंने अपनी 12वीं तक की शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय सीहोर और होशंगाबाद से…

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